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स्वामी विवेकानंद जीवनी, विचार, मृत्यु

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Swami Vivekananda Biography in Hindi

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय
पूरा नाम नरेंद्र नाथ विश्वनाथ दत्त
जन्म
12 जनवरी 1863 कलकत्ता (अब कोलकाता)
मृत्यु
4 जुलाई 1902 (उम्र 39) बेलूर मठ, बंगाल रियासत, ब्रिटिश राज (अब बेलूर, पश्चिम बंगाल में)
पिता विश्वनाथ दत्त
माता भुवनेश्वरी देवी
गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस
घरेलू नाम नरेन्द्र और नरेन
साहित्यिक कार्य
राज योग, कर्म योग, भक्ति योग, ज्ञान योग, माई मास्टर
कथन
“उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये”
धर्म हिन्दू
राष्ट्रीयता भारतीय
शिक्षा 1884 में बी. ए. परीक्षा उत्तीर्ण
विवाह विवाह नहीं किया
भाई-बहन 9

Essay on Swami Vivekananda in Hindi

स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 में हुआ था। स्वामी जी का वास्तविक नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। हालांकि नरेंद्र नाथ की माँ एक धर्मनिष्ठ महिला थी और वे घर में एक धार्मिक माहौल में पली-बढ़ी थी, उन्होंने अपनी युवावस्था की शुरुआत में एक गहरा आध्यात्मिक संकट झेला था। उनके सुव्यवस्थित ज्ञान ने उन्हें ईश्वर के अस्तित्व पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित किया और कुछ समय के लिए वह अज्ञेयवाद में विश्वास करते थे। फिर भी वह सुप्रीम के अस्तित्व को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं कर सकते थे और इस वजह से वे कुछ समय के लिए केशवचन्द्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म आंदोलन से जुड़े।

ब्रह्म समाज ने मूर्ति पूजा, अंधविश्वास से ग्रस्त हिंदू धर्म के विपरीत एक ईश्वर को मान्यता दी। ईश्वर के अस्तित्व के बारे में दार्शनिक प्रश्नों की मेजबानी उनके दिमाग में घूमती रहती है। इस आध्यात्मिक संकट के दौरान, विवेकानंद ने पहली बार स्कॉटिश चर्च कॉलेज के प्रिंसिपल विलियम हस्ती से श्री राम कृष्ण के बारे में सुना। इससे पहले, भगवान के लिए अपनी बौद्धिक खोज को संतुष्ट करने के लिए, नरेंद्र नाथ ने सभी धर्मों के प्रमुख आध्यात्मिक नेताओं का दौरा किया, उनसे एक ही सवाल पूछा, “क्या आपने भगवान को देखा है?”

उन्होंने वहीं प्रश्न श्री रामकृष्ण को दक्षिणेश्वर काली मंदिर के परिसर में अपने निवास पर रखा। एक पल की हिचकिचाहट के बिना, श्री रामकृष्ण ने उत्तर दिया:

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हाँ, मेरे पास हैं। मैं ईश्वर को उतना ही स्पष्ट रूप से देखता हूँ जितना मैं तुम्हें देखता हूँ, केवल बहुत गहरे अर्थों में।

रामकृष्ण की सादगी से शुरू में प्रभावित हुए स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण के उत्तर से चकित थे। रामकृष्ण ने धीरे-धीरे इस तर्कशील युवक को अपने धैर्य और प्रेम से जीत लिया। नरेंद्र नाथ ने जितना अधिक दक्षिणेश्वर का दौरा किया, उतने ही अधिक उनके सवालों के जवाब दिए गए।

Information About Swami Vivekananda in Hindi

आध्यात्मिक जागृति

1884 में, नरेंद्र नाथ अपने पिता की मृत्यु के कारण काफी आर्थिक संकट से गुजरे क्योंकि उन्हें अपनी माँ और छोटे भाई-बहनों का साथ देना पड़ा। उन्होंने रामकृष्ण से अपने परिवार के आर्थिक कल्याण के लिए देवी से प्रार्थना करने के लिए कहा। रामकृष्ण के सुझाव पर वह खुद मंदिर में प्रार्थना करने गए। लेकिन एक बार जब उन्होंने देवी का सामना किया, तो वे धन और धन नहीं मांग सकते थे, इसके बजाय उन्होंने “विवेक” (विवेक) और “वैराग्य” (शामिल करने) के लिए कहा। उस दिन नरेंद्र नाथ के पूर्ण आध्यात्मिक जागरण को चिह्नित किया गया और उन्होंने खुद को जीवन के एक तपस्वी के रूप में पाया।

Swami Vivekananda History in Hindi

एक भिक्षु का जीवन

1885 के मध्य के दौरान, गले के कैंसर से पीड़ित रामकृष्ण गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। सितंबर 1885 में, श्री रामकृष्ण को कलकत्ता के श्यामपुर ले जाया गया, और कुछ महीने बाद नरेंद्र नाथ ने कोसीपोर में किराए का विला लिया। यहां, उन्होंने युवा लोगों का एक समूह बनाया जो श्री रामकृष्ण के अनुयायी थे और उन्होंने एक साथ अपने गुरु का पालन-पोषण समर्पित भाव से किया।

16 अगस्त 1886 को श्री रामकृष्ण ने अपना नश्वर शरीर त्याग दिया। श्री रामकृष्ण के निधन के बाद, नरेंद्र नाथ सहित उनके लगभग पंद्रह शिष्य उत्तर कलकत्ता के बारानगर में एक जीर्ण-शीर्ण इमारत में एक साथ रहने लगे, जिसका नाम रामकृष्ण का राक्षसी क्रम रामकृष्ण मठ था।

यहां, 1887 में, उन्होंने औपचारिक रूप से दुनिया से सभी संबंधों को त्याग दिया और भिक्षुणता की प्रतिज्ञा ली। भाईचारे ने अपने आप को फिर से संगठित किया और नरेंद्र नाथ विवेकानंद के रूप में उभरे जिसका अर्थ है बुद्धिमानी का आनंद“। भाईचारा पवित्र भिक्षा या मधुकर के दौरान संरक्षक द्वारा स्वेच्छा से दान की गई भिक्षा पर रहता था, योग और ध्यान करता था।

स्वामी विवेकानंद जी ने 1886 में मठ छोड़ दिया और परिव्राजक के रूप में पैदल भारत का दौरा किया। उन्होंने देश के उन हिस्सों की यात्रा की, जहां वे संपर्क में आए लोगों के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं को अवशोषित करते हैं। उन्होंने जीवन की उन प्रतिकूलताओं को देखा, जिनका सामना आम लोगों को, उनकी बीमारियों को करना पड़ा, और इन कष्टों से राहत दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित करने की कसम खाई।


Swami Vivekananda Chicago Speech in Hindi

अब मैं आपको शिकागो व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद ने क्या संदेश दिया था विस्तार से लिखकर बताऊंगा।

अमेरिका में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की और से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदांत दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानंद के द्वारा ही पहुंचा। स्वामी जी ने राम कृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना कार्य उसी प्रकार कर है। इनके गुरु का नाम श्री रामकृष्ण परमहंस हैं। उन्हें प्रमुख रूप से उनकी भाषण करते समय मेरे अमेरिकी भाइयो और बहनो बोलने की वजह से जाना जाता था। उनके बोलने के इस कथन ने सबका दिल जित लिया था। वे बंगाली परिवार में जन्मे थे और वे आध्यात्मिकता की ओर झुके हुए थे।

स्वामी जी अपने गुरु रामकृष्ण देव जी से बहुत प्रभावित थे उन्होंने सीखा की सारे जीव परमात्मा का ही अवतार है इसलिए मानव जाति की सेवा द्वारा परमात्मा की भी सेवा की जा सकती है। रामकृष्ण जी की मृत्यु के बाद विवेकानंद ने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया और ब्रिटिश भारत में मौजूदा स्थितियों का ज्ञान हासिल किया, बाद में विश्व धर्म संसद में भारत का प्रतिनिधित्व करने और संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए कूच की। स्वामी जी ने अमेरिका, यूरोप और इंग्लैंड में भारतीय हिन्दू दर्शन का प्रसार किया, कई सार्वजनिक और निजी व्याख्यानों का आयोजन किया।

स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

स्वामी विवेकानंद पर निबंध और स्वामी विवेकानंद भाषण
राष्ट्रीय युवा दिवस पर भाषण
राष्ट्रीय युवा दिवस पर निबंध

स्वामी विवेकानंद की जीवनी

स्वामी जी बचपन से ही स्वामी जी कुशाग्र बुद्धि के साथ साथ नटखट भी थे। अपने साथी और दोस्तों के साथ मिलकर खूब शरारत करते थे और मौका मिलने पर अध्यापकों के साथ भी शैतानी करने से नहीं चूकते थे। स्वामी विवेकानंद की माता धार्मिक परवर्ती की थी, उन्हें रामायण, भगवत गीता और महाभारत का पाठ सुनने का शौंक था और घर में रोज नियमपूर्वक पूजा हुआ करती थी।

कथावाचक उनके घर आकर भी कथा करते थे, धार्मिक तथा आध्यात्मिक परिवार के होने की वजह से स्वामी जी के लक्षण भी बिलकुल धार्मिक परवर्ती के थे। माता पिता के संस्कार स्वामी जी में पूर्ण रूप से थे। धार्मिक परवर्ती के होने के कारण बचपन में ही उनके मन में ईश्वर को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई जिसकी वजह से वह माता पिता से प्रश्न ही पूछते रहते थे।

कभी कभी तो स्वामी जी ऐसे प्रश्न पूछते थे जिससे पंडित जी भी सोच में पड़ जाया करते थे। स्वामी विवेकानंद जी को शास्त्रीय संगीत का भी ज्ञान था वे नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम और खेलो में भी भाग लिया करते थे स्वामी विवेकानंद जी।

स्वामी विवेकानन्द की शिक्षा

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय
Swami Vivekananda Images

Swami Vivekananda Education in Hindi

स्वामी विवेकानंद जी ने सन् 1871 में आठ साल की उम्र में ईश्वर चंद विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन संस्थान में दाखिला लिया जहाँ उन्होंने स्कूल जाना प्रारम्भ किया। सन् 1877 में उनका परिवार रायपुर चला गया। सन् 1879 में उनका परिवार वापस कलकत्ता आ गया। वह प्रेसीडेंसी कॉलेज प्रवेश परीक्षा में प्रथम डिवीज़न से अंक प्राप्त करने वाले वे एकमात्र छात्र थे।

वे दर्शन, धर्म, इतिहास तथा सामाजिक विज्ञान आदि कई विषयों के उत्साही पाठक थे। स्वामी जी की वेद, उपनिषद, रामायण, गीता और कई पुराणों में तथा हिन्दू शास्त्रों में गहन रुचि थी। स्वामी विवेकानंद जी को शास्त्रीय संगीत का भी ज्ञान था। वे नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम और खेलो में भी भाग लिया करते थे। स्वामी जी ने यूरोपीय इतिहास का अध्ययन जनरल असेंबली इंस्टीट्यूशन में किया।

सन् 1881 में उन्होंने ललित कला की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1884 में कला स्नातक की डिग्री पूरी कर ली। स्वामी जी ने स्पेंसर की किताब एजुकेशन का बंगाली में अनुवाद किया। ये हर्बट स्पेंसर की किताब से काफी प्रभावित थे। विलयम हेस्टी महासभा संस्था के प्रिंसिपल ने लिखी नरेन्द्र नाथ वास्तव में एक जीनियस है मेने काफी बड़े इलाको में यात्रा की है लेकिन नरेन्द्र नाथ जैसी प्रतिभा वाला एक भी एक भी बालक नहीं देखा अनेक बार इन्हे श्रुतिधर भी कहा गया है।

स्वामी विवेकानंद की किताब

स्वामी विवेकानंद के ऊपर अनेकों किताब लिखी गई है जिनमें से कुछ पुस्तक इस प्रकार है:-

Swami Vivekananda Books in Hindi

  1. Thoughts to Inspire: Swami Vivekanand
  2. Inspiring Thoughts (Inspiring Thoughts Quotation Series)
  3. Karmayoga (English)
  4. Rajyoga – रोजयोग
  5. Gyanyoga – ज्ञानयोग
  6. Karmayog (हिंदी) – कर्मयोग
  7. Bhaktiyoga – भक्तियोग

इस प्रकार और भी पुस्तक है। इन सभी पुस्तक को आप ऑनलाइन Amazon.in से खरीद सकते हो|

स्विवामी वेकानंद जी के योगदान

स्वामी विवेकानंद की जीवनी: उन्तालीस वर्ष की उम्र में स्वामी विवेकानंद जी जो कार्य कर गए है आज की पीढ़ी को इतना कार्य करने में कई वर्ष लग जायेंगे। उनके द्वारा तीस वर्ष की उम्र में स्वामी विवेकानंद जी ने अमेरिका के विश्व धर्म सम्मेलन में हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व किया।

  • गुरुदेव रवीन्द्रनाथ जी ने एक बार कहा था यदि आप भारत को जानना चाहते है तो विवेकानंद को पढ़िए उनमें आप सब कुछ सकारात्मक ही पाएंगे नकारात्मक कुछ भी नहीं।
  • रोमा रोला ने कहा है कि स्वामी जी का द्वितीय होने की कल्पना भी करना असंभव है। स्वामी जी जहाँ भी गए है हमेशा प्रथम ही आये है हर कोई उनमें एक नेता और गुरु का दिग्दर्शन करता था।
  • स्वामी जी ईश्वर के प्रतिनिधि थे और सब पर प्रभुत्व पाना उनकी विशिष्टता थी। हिमालय में एक बार एक यात्री स्वामी जी को देखकर रुक गया और देखते ही चिल्ला कर बोला शिव मानो स्वामी जी में उसने अपने आराध्य को देखा हो।
  • स्वामी जी केवल संत ही नहीं बल्कि वो एक महान देशभक्त, वक्ता, विचारक, लेखक और मानव प्रेमी थे। स्वामी जी का विश्वास था भारत पवित्र धर्म और दर्शन की भूमि है क्योंकि इसी भारत देश की भूमि पर बड़े बड़े महात्मा और ऋषियों का जन्म हुआ।
  • यह भूमि त्याग और सन्यास की भूमि है और उनका मानना था की यही इसी धरती पर मनुष्य के लिए सर्वोच्च जीवन तथा मुक्ति का द्वार खुला है।

स्वामी विवेकानंद जी का कथन “उठो जागो और ओरो को भी जगाओ अपने मनुष्य जन्म को सफल करो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाय”

उनके इस कथन ने लोगों की सोच बदल दी और उन्हें उनके जीवन में कुछ करने की एक राह मिली।

  • उन्नीसवीं सदी के आखरी वर्षों में विवेकानंद जी हिंसक क्रांति से भारत को आजाद करना चाहते थे फिर उन्होंने “एकला चलो” की निति को अपना कर भारत और दुनिया को खंगाल डाला।
  • स्वामी जी ने कहा था कि मुझे बहुत से युवा सन्यासी चाहिए जो पूरे भारत में फैलकर देशवासियों की सेवा में लग जाये।
  • स्वामी विवेकानंद जी धार्मिक आडंबर और रूढ़ियों के सख्त खिलाफ थे। स्वामी जी का कहना है कि धरती की गोद में भारत ही एक ऐसा देश है जहा मनुष्य हर तरह है बेहतरी के लिए हर ईमानदार कोशिश करता हैं।

स्वामी विवेकानंद की मृत्यु कैसे हुई?

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स्वामी विवेकानंद की मृत्यु का कारण ?
Swami Vivekananda Photo

Swami Vivekananda Death Reason in Hindi

अपने जीवन के अंतिम दिनों में स्वामी जी ने ‘शुक्ल यजुर्वेद’ की व्याख्या की और कहा एक और विवेकानंद चाहिए।

इस विवेकानंद को समझने के लिए इस विवेकानंद ने अब तक क्या किया?

5 जुलाई 1902 अपनी जिंदगी के अंतिम दिन को भी उन्होंने अपनी रोज की दिनचर्या को नहीं बदला, ध्यान करने बैठ गए और ध्यान करने की मुद्रा में ही समाधी ले ली। अगर आपको स्वामी विवेकानंद की मृत्यु के विषय में और विस्तार से जानना है तो आप नीचे दिए गये लिंक पर क्लिक करें।


रामकृष्ण मिशन का उद्देश्य

गुरु भक्ति से प्रेरित होकर सेवा भाव से देश के नागरिकों का उत्थान करने के लिए स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में अपने गुरु के नाम पर एक संस्था की शुरुआत की जिसका नाम रामकृष्ण मिशन रखा गया। इस संस्था को स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य भारत की पावन धरती पर जन्मे संत-मुनियों एवं महापुरुषों के आदर्शों एवं गौरवान्वित करने वालेे विचारों एवम् परंपराओं को जनता तक पहुंचाना था। इस संस्था के शुरू करने के मुख्य तीन उद्देश्य निम्नलिखित है।

  • 👉 दीन दुखियों, गरीबों की सेवा एवं ईश्वर की भक्ति करना।
  • 👉 भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में वेदांत का प्रचार प्रसार करना।
  • 👉 विभिन्न धर्म के बीच सौहार्द कायम करना ताकि सभी धर्म मिलजुल कर रहे।

आज 100 से भी अधिक वर्ष हो चुके है और आज भी रामकृष्ण मिशन अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कार्य कर रहा है। वर्तमान में इस संस्था के लगभग 130 से अधिक संस्थाएं भारत समेत विश्व के अनेक देशों में है। रामकृष्ण परमहंस से हुई मुलाकात के पश्चात स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन को गुरु के चरणों में समर्पित कर दिया। अपने गुरु की सभी आज्ञाओं का पालन कर उनके द्वारा दी गई शिक्षा को वे आचरण में लाते थे। और जब उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का शरीर रोगी हो गया था। तो अंतिम दिनों में स्वामी विवेकानंद ने पूरी सेवा भाव से अपनी गुरु भक्ति में लीन रहकर उनकी सेवा की।

वर्ष 1886 में गुरु रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु हो गई। गुरु की शिक्षा का पालन कर उनके बताएं पथ पर चलते हुए स्वामी विवेकानंद ने मरणोपरांत 1897 में अपने गुरु के नाम से रामकृष्ण मिशन की शुरुआत की। मठ का मुख्य लक्ष्य रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के दिव्य ज्ञान, संदेश को जनता तक पहुंचाना है, आरंभ में इस मिशन की शुरुआत कोलकाता में स्थापित मठ से की गई।


स्वामी विवेकानंद की प्रेरक कहानियां

स्वामी विवेकानंद का जीवन लोगों के लिए आदर्श जीवन रहा है, उनके जीवन काल से मनुष्य को कई ऐसी सीख मिलती है। जिनको अगर मनुष्य अपनी जिंदगी में अपना लें, तो वह निश्चित ही सफलता प्राप्त कर सकता है। आइए उनके जीवन से जुड़ी कुछ कहानियां जानते हैं।

1. लक्ष्य पर फोकस करना: स्वामी विवेकानंद कहानियां

एक बार की बात है स्वामी विवेकानंद अपने आश्रम में विश्राम कर रहे थे और इतने में एक व्यक्ति आया और बेहद दुखी भाव से स्वामी जी के चरणों में गिर कर कहने लगा की स्वामी जी मैं अपने जीवन में बहुत परिश्रम करता हूं लेकिन इसके बावजूद मुझे सफलता हासिल नहीं हो रही है।

यह सुनकर स्वामी विवेकानंद कहते हैं, आप एक काम कीजिए यह मेरा पालतू कुत्ता है इसे थोड़ी देर वहां घुमा कर लाइए और मैं तब तक आपकी इस समस्या का समाधान ढूंढता हूं इतने में वह व्यक्ति उस कुत्ते को घुमाकर वापस लाता है। तो स्वामी जी उस व्यक्ति से कहते हैं कि यह कुत्ता इतना क्यों हांफ रहा है? जबकि तुम्हारे चेहरे पर थकान के कोई भी भाव नहीं दिख रहे।

इतने में व्यक्ति कहता है कि मैं तो सीधा सिर्फ रास्ते पर चल रहा था। परंतु यह कुत्ता रास्ते पर चलते हुए बार-बार कभी इधर जाता तो कभी उधर हर बार कोई ना कोई चीज देख कर उसकी तरफ दौड़ने लगता, इसलिए यह हांफ रहा है।

यह सुनकर स्वामी विवेकानंद बोले बस यही तुम्हारे प्रश्नों का जवाब है, तुम्हारा लक्ष्य हमेशा तुम्हारे सामने होता है। लेकिन तुम बजाय उस लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के कभी इधर भटक जाते हो कभी उधर। स्वामी जी की इन बातों से संतुष्ट होकर उस व्यक्ति को समझ में आता है कि हमें सफलता हासिल करने के लिए सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

2. नारी का आदर सम्मान: Swami Vivekananda Story in Hindi

अपने जीवन काल में स्वामी जी ने न सिर्फ देश में अपितु विदेशों में भी कई ऐसे भाषण दिए जिनकी वजह से लोगों ने उन्हें अपना आदर्श मान लिया।

एक बार की बात है स्वामी विवेकानंद के विचार और स्पीच सुनकर एक विदेशी महिला बेहद प्रभावित हुई और उनके पास आकर कहने लगी, स्वामी जी मैं आपसे शादी करना चाहती हूं! ताकि मुझे आपके जैसे ही महान पुत्र की प्राप्ति हो इसमें स्वामी विवेकानंद ने कहा कि आप जानती हैं मैं एक सन्यासी हूं और मैं किसी भी स्त्री से विवाह बिल्कुल नहीं कर सकता, उन्होंने कहा “आप चाहो तो मुझे अपना पुत्र बना लें, जिससे मैं भी आजीवन सन्यासी रहूंगा और आपको मेरे जैसा पुत्र भी मिल जाएगा”।

स्वामी जी के इन उच्च विचारों को सुनकर वह महिला उनके चरणों में गिर गई और कहने लगी आप महान है जो किसी भी स्थिति में अपने धर्म से तनिक भी विचलित नहीं होते।

3. डर का सामना करें: स्वामी विवेकानंद स्टोरी

यह घटना स्वामी जी के जीवन से जुड़ी एक सच्ची कहानी पर आधारित है।

एक बार की बात है स्वामी जी बनारस के दुर्गा मां के मंदिर से प्रस्थान कर रहे थे। लेकिन रास्ते में बंदरों की एक टोली ने उन्हें घेर लिया। अब इधर-उधर देखने के बाद जब स्वामी जी को लगा कि बंदरों ने घेर लिया और वे हमला कर सकते हैं। तो उनसे बचने के लिए वे वहां से भागने लगे तभी एक सन्यासी की नजर स्वामी जी पर पड़ी और उन्होंने कहा…

रुको, इन बंदरों का सामना करो

स्वामी जी के यह वचन सनकर वे बंदरों की तरफ पलटे और उनकी तरफ बढ़ने लगे.. बंदरों ने उन्हें अपनी ओर आता देख कर बंदर वहां से भाग निकले! उन्होंने जीवन की इस घटना से सीख ली और आने वाले वर्षों में जब स्वामी जी एक वक्ता बन चुके थे तो उन्होंने यहीं बात अपने अनुयायियों को कहीं की जीवन में अगर आपको किसी चीज से डर लगता है तो उस से डरें नहीं बल्कि पलट कर उस डर का सामना करें।


Facts About Swami Vivekananda in Hindi

👉 अगर आप स्वामी विवेकानंद के विचारों उनके जीवन से प्रभावित हुए हैं तो स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य जो उनके अनुयायियों को जरूर जानने चाहिए।

बाल्यकाल में स्वामी विवेकानंद का नाम वीरेश्वर था। उन्हें इस नाम से पुकारे जाने के पीछे मान्यता है स्वामी विवेकानंद की माता के हुए एक सपने के कारण उनका यह नाम रखा गया। किंतु परिवार के लोग चाहते थे उनका नाम दुर्गादास हो।

इस महापुरुष को बचपन में जब भी गुस्सा आ जाता तो स्वामी विवेकानंद की मां उनके क्रोध को शांत करने के लिए उनके सिर पर ठंडा जल डालती थी। और कहती थी ओम नमः शिवाय का जाप करो जिससे उनका गुस्सा शांत हो जाता था। मान्यता है स्वामी विवेकानंद चाय पीना बेहद पसंद करते थे। और उन्होंने अपने मठ में चाय पीने की स्वीकृति दी थी, हालांकि यह बात उस समय की मान्यताओं के खिलाफ थी।

स्वामी जी के पिता की मृत्यु के पश्चात परिवार को घोर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। कई बार तो उनके पास खाने के लिए पैसे नहीं होते थे और परिवार के सदस्यों की भोजन आपूर्ति के लिए अक्सर स्वामी जी अपना भोजन यह कहकर त्याग देते थे कि मुझे कहीं खाने पर आमंत्रित किया गया है।

देखने में स्वामी जी का रंग रूप महिलाओं को मोहित करता था। और वे उन्हें अपना मित्र बनाना चाहती थी लेकिन जब भी किसी महिला से उन्हें ऐसा प्रस्ताव मिलता है तो स्वामी जी कहते “बेकार की बातों को छोड़कर भगवान पर ध्यान लगाओ”। स्वामी जी का अपनी मां के प्रति अटूट प्रेम था। वे जीवन भर मां की पूजा करते रहे। अपनी मां से ही बचपन से उन्हें अध्यात्म की और अपना ध्यान लगाने की प्रेरणा मिली।

माना जाता है कि स्वामी जी अक्सर यह शब्द कहते थे कि मैं 40 वर्ष से अधिक नहीं जिऊंगा और उनकी यह भविष्यवाणी सच भी साबित हुई 39 वर्ष की उम्र में वे दुनिया को छोड़ कर चले गए।


स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार

Swami Vivekananda Quotes in Hindi

Swami Vivekananda Quotes in Hindi for Students
  • Quotes 1. “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये। – स्वामी विवेकानंद के विचार
  • Quotes 2. “ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमीं हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है। Swami Vivekananda Motivational Quotes in Hindi
  • Quotes 3. “जिस तरह से विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न धाराएं अपना जल समुद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा भगवान तक जाता है। – Swami Vivekanand Suvichar in Hindi
  • Quotes 4. “किसी की निंदा ना करेंअगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये। कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है, ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है। – स्वामी विवेकानंद के शैक्षिक विचार
  • Quotes 5. “अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है।” – स्वामी विवेकानंद सुविचार हिंदी में
  • Quotes 6. “हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिये कि आप क्या सोचते हैं. शब्द गौण हैं. विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं। – स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन
  • Quotes 7. “सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा। – स्वामी विवेकानंद के विचार
  • Quotes 8. “दुनिया एक महान व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं। – स्वामी विवेकानंद के वचन
  • Quotes 9. “यदि स्वयं में विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढ़ाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता।” – Swami Vivekananda Thoughts in Hindi
  • Quotes 10. “उस विचार को अपना जीवन बना लो, उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो, उस विचार को जियो। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो। यही सफल होने का तरीका है।– Swami Vivekanand Ke Anmol Vichar
Question and Answer on Swami Vivekananda in Hindi

Question and Answer on Swami Vivekananda

Swami Vivekananda GK in Hindi

प्रश्न: घर में स्वामी विवेकानंद का क्या नाम था?
उत्तर: नरेन्द्र नाथ दत्त

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद के पिता का नाम क्या था?
उत्तर: विश्वनाथ दत्त

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद की माता का नाम क्या था?
उत्तर: भुवनेश्वरी देवी

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद का जन्म कब हुआ?
उत्तर: सन् 1863

प्रश्न: मैंने एक पुत्र के लिए शिव से प्रार्थना की और उसने मुझे अपने एक राक्षस को भेजा “विवेकानंद के बारे में यह किसने कहा”?
उत्तर: विवेकानंद की माता ने

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद द्वारा लगभग सात वर्ष की आयु में किस संस्कृत व्याकरण को हृदय से लगा लिया?
उत्तर: Mugdha Buddha

प्रश्न: सात वर्ष की आयु में नरेंद्र महानगर संस्था में शामिल हुए, जिसकी स्थापना किसके द्वारा की गई थी?
उत्तर: Pandit Ishwar Chandra Vidyasagar

प्रश्न: वर्ष 1877 में नरेंद्र नाथ और उनके पिता मध्य प्रदेश के किस स्थान पर गए थे?
उत्तर: रायपुर

प्रश्न: नरेन्द्र नाथ ने सबसे पहले किस कॉलेज में अपनी पढ़ाई की?
उत्तर: प्रेसिडेन्सी विश्वविद्यालय, कोलकाता

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय पढ़ कर आपको कैसा लगा हमें जरूर बताएं।

स्वामी विवेकानंद के विषय में अभी भी अगर आपको कुछ पूछना है तो आप कमेंट के माध्यम से पूछ सकते हो। अगर आपको स्वामी विवेकानंद की जीवनी पसंद आई हो तो इस जानकारी को सोशल मीडिया के माध्यम से अन्य लोगों तक पहुचाएं।

– Biography of Swami Vivekananda in Hindi

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1 Comment

  1. बहुत ही बडिया जानकारी प्रदान करने के लिये आपको धन्यवाद भैया जी ।

    जय सियाराम जी ।

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