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होली पर निबंध (Essay on Holi in Hindi) Holi Par Nibandh

Essay on Holi in Hindi For Class 1, 2, 3, 4, 5 to 10
Written by Himanshu Grewal

शीर्षक : Essay on Holi in Hindi | होली का महत्व | होली पर निबंध : होली रंगों का त्यौहार है। होली वसंत ऋतु में मनाई जाती है। होली का त्यौहार हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्यौहार पारम्परिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। यह त्यौहार मुख्यता भारत और नेपाल में मनाया जाता है।

होली त्यौहार के पहले दिन होली जलाई जाती है जिसे हम दुल्हेंडी कहते है या होलिका दहन भी कहा जाता है। दूसरे दिन होली मनाई जाती है। इस दिन लोग एक दूसरे पर गुलाल फेंकते हैं, एक दूसरे को रंग लगाते है, अलग अलग रंगों से एक दूसरे को रंगते हैं। इस दिन मीठे पकवान बनते है, ढोल बजाया जाता है, ठाठ ढोल बजाकर होली के गीत गाये जाते है, पुराने गिले शिकवे भूलकर गले लगकर फिर से नई शुरुआत करने का मौका मिलता है।

Essay on Holi in Hindi For Class 1, 2, 3, 4, 5 to 10

Short Essay on Holi Festival in Hindi

Holi Essay in Hindi 10 Lines

होली का त्यौहार रंगों का त्योहार होने के साथ साथ बुराई खत्म होने और अच्छाई का जन्म लेने का दिन भी होता है। इस दिन मीठे पकवान में रसगुल्ले, जलेबी, दही बड़े, खाजा और भी पकवान बनते है। यह त्यौहार वसंत पंचमी के आते ही शुरू हो जाता है और पूरे फाल्गुन मास चलता है। फाल्गुन मास में खेतों में सरसों उगती है। सरसों की खुशबू फाल्गुन के महीने को और भी ज्यादा आकर्षक बनाती है इस दिन फाग और धमार का गाना प्रारम्भ हो जाता है। पेड़ पौधे पक्षी मनुष्य सभी उल्लास से झूमते है हर तरफ रंगों की फुहार होती है। फाल्गुन मास में ही गेहूं के बलिया आती है।

बच्चे तो इस त्यौहार का बहुत ही बेसब्री से इंतजार करते है। बच्चे होली का त्यौहार मनाने के लिए पिचकारी और गुब्बारे खरीदते है। बच्चे गुब्बारों में पानी भरकर सबको मारते है और होली के त्यौहार का आनन्द लेते है। यह त्यौहार एक आनन्दित त्यौहार है। रंगों का त्यौहार होली की वजह से रंग बिरंगा त्यौहार है। इस त्योहार को हमें रंगों से ही मानना चाहिए।

आज कल बाजार में अजीब से रंग आते है जिनमें केमिकल मिले होते है जिनकी वजह से हमारे शरीर को नुकसान पहुंचता है, हमारी त्वचा खराब होती है इसलिए हमें होली खेलने के लिए सिर्फ गुलाल का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि गुलाल हमें कोई हानि नहीं पहुंचाता हैं।


होली की कहानी और कथा – होली पर निबंध

यह प्राचीन काल की बात है अत्याचारी हिरण्यकश्यप ने घोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान पा लिया की इस संसार का कोई भी जीव जंतु, देवी, देवता, राक्षस, मनुष्य उसे ना मार सके न वो धरती पर मरे ना वो आकाश में मरे और ना ही उसे कोई शस्त्र मार सके। ऐसा वरदान पाकर हिरण्यकश्यप निरंकुश बन गया। कुछ समय बाद हिरण्यकश्यप के पुत्र का जन्म हुआ उसका नाम प्रहलाद था।

प्रहलाद परमात्मा में अटूट विश्वास रखने वाला था। प्रहलाद भगवान विष्णु का अटूट भक्त हुआ और भगवान विष्णु की भी असीम कृपा दृष्टि प्रहलाद पर थी। प्रहलाद भगवान विष्णु की पूजा किया करते थे तो यह देखकर हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को आदेश दिया की वह उनके अलावा किसी की भी पूजा ना करें परन्तु प्रहलाद ने हिरण्यकश्यप की आज्ञा ना मानकर अपने प्रभु भगवान विष्णु नारायण की पूजा की। यह देख हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने की योजना बनाई।

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हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने के कई जतन किये परन्तु सब असफल रहे। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि से बचने का वरदान था। होलिका को वरदान में एक एसी चादर मीली थी जो आग में नहीं जलती थी। होलिका ने प्रह्लाद को गोद मे लेकर जलाने का प्रयत्न किया। भगवान के आशीर्वाद से चादर वायु के वेग से बालक प्रह्लाद के ऊपर जा गिरी और होलिका जलकर भसम हो गयी और बालक प्रह्लाद जीवित बच गया।

होलिका के मरने के उपलक्ष्य में तब से ही होली मनाई जाती है और उसके बाद हिरण्यकश्यप को मारने के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया और सुबह और शाम के बीच के समय में दरवाजे की चोखत पर बैठकर हिरण्यकश्यप का वध किया।


Holi Par Nibandh | Holi Ka Nibandh

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होलिका दहन की कहानी और कथा

होली की पहली शाम के समय होलिका दहन किया जाता है। इस होलिका दहन में लोग अपने अपने घर से लकड़ी लेकर आते है और उन सभी लकड़ी को मिलाकर होलिका बनाई जाती है। होलिका में गोबर के उपले भी लगाये जाते है। होली की तैयारी लगभग एक महीने पहले से ही शुरू हो जाती है। कई जगह पर तो होली में भरभोलिए भी जलाए जाते हैं, अधिकतम होलिका चौराहे पर लगाई जाती है।

भरभोलिए भी गोबर के उपले जैसे ही होते हैं परंतु उनमें एक छोटा सा छेद होता है। इस छेद में मुंज की रस्सी डालकर माला बनाई जाती है। भरभोलिए की इस माला को बनाकर भैयो के सर के ऊपर से सात बार घुमाकर रात के समय जब होलिका जलाई जाती है तब ये भरभोलिए होलिका में जलाये जाते है।

लोगों का मानना है कि ऐसा करने से भाइयों के ऊपर लगी नजर उतर जाती है।

होलिका का दोपहर से ही विधिवत पूजन शुरू हो जाता है। घरों में बने पकवान और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। सुहागन औरत जब तक पूजा नहीं करती तब तक कुछ नहीं खाती पूजा करने के बाद ही कुछ खाती है। जिन औरतों के बेटे नहीं होते वे औरतों होलिका से बेटे की ख्वाहिश भी करती है और जिनके बेटे होते है वे अपने बेटे के लिए लम्बी उम्र की दुआ मांगती है।

इस दिन माँ अपने बेटे के लिए एक माला भी बनाती है जिस माला में गोला बादाम किशमिश और भी कई खाने की चीजे मिलाई जाती है। होलिका पूजन के समय इस माला को भी पूजा का हिस्सा बनाया जाता है और फिर इसे बेटे के गले में डाल दिया जाता है फिर शाम के समय पंडित द्वारा मुहूर्त निकालकर होलिका जलाई जाती है। इस तरह बाई को जलाकर अच्छे की कामना की जाति है और अगले दिन रंगों से खेलकर रन बिरंगी होली मनाई जाती है।


होली के संबंधित कुछ मनोवैज्ञानिक तथ्य जो आप नहीं जानते

होली को लेकर ये मान्यताएं है कि इस त्योहार को न मानने वाले लोग अंदर से काफी उदास, कम सामाजिक होते हैं अब वह कैसे आइए जानते है।

जी हां अब हम होली को एक अलग दृष्टिकोण से देखेंगे और वो दृष्टिकोण है मनोवैज्ञानिक। जैसा की हम जानते है कि होली एक प्रसिद्ध भारतीय त्योहार है और इसे रंग लगाकर खेला जाता है तो ये मनोरंजन का त्योहार भी हैं। ऐसे में आपने देखा होगा की कुछ लोग ऐसे भी होते है जिन्हें न तो रंग लगाना पसंद होता है न ही होली खेलना और कुछ ऐसे भी होते जिन्हें रंग लगाना इतना पसंद होता है कि वे लोग अपनी मस्ती में सब कुछ भूल जाते हैं। तो आइए जानते है मनोविज्ञान क्या कहता हैं?

Holi 2022: जिन्हें होली नहीं पसंद

तो यदि मनोवैज्ञानिक ढंग से माने तो इस प्रकार के व्यक्ति अंदर से उदास होते है, कम सामाजिक होते है और अपने मन की बातें मन में ही रखना पसंद करते हैं। ऐसे लोगों को शांति पसंद होती है और खुद तक ही सीमित रहते हैं।

होली 2022: जिन्हें होली है बहुत पसंद

जो लोग होली पसंद करते है। इस प्रकार के लोग बहुत अधिक शरारती स्वभाव के होते हैं। बहुत ज्यादा सक्रिय और सामाजिक मिलनसार होते हैं। ऐसे लोग जहां जाते वहां के माहौल को ही बदल देते हैं।


होली की शुरुआत कब हुई थी

होली यूँ तो हिंदू धर्म में काफी पहले से खेली जाती है और ऐसा माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण भी होली खेला करते थे अपने सिखाओ और गोपियों के साथ। राधा रानी को भी रंग से भिगो देते थे। बहुत सारी काव्य रचनाओं में इसका वर्णन
मिलता है पर इसका कोई प्रामाणिक साक्ष्य नहीं है। मान्यता के अनुसार द्वापर युग से होली खेली जाती है।

भारत के पश्चिम बंगाल में होली को किस नाम से जाना जाता हैं?


भारत में पश्चिम बंगाल में होली उत्सव को, डोल पूर्णिमा तथा बसंत उत्सव के रूप में मनाया जाता हैं ।

भारतीय त्योहारों को मनाने वाला दूसरा देश कौन सा है?


भारतीय त्योहारों को मनाने वाला दूसरा देश नेपाल है क्योंकि नेपाल भी एक हिंदू राष्ट्र है और भारत का पड़ोसी भी है। यहां पर होली का त्यौहार भी बड़े धूम-धाम से मनाया जाता हैं।

दक्षिण भारत में होली को किन नामों से पुकारा जाता हैं?


दक्षिण भारतीय राज्यों में तमिलनाडु में विशेषकर होली को काम विलास, पंडीगाई, कमदाम नाम से पुकारा जाता है क्योंकि इसे काम देव के बलिदान के रूप में मनाने की मान्यता है। तथा कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि राज्यों में इस कामना हब्बा के नाम से संबोधित किया जाता है।

त्यौहार आने पर बच्चे खुश क्यों होते हैं?


कोई भी त्योहार को बच्चे अधिक उत्साहित और खुश रहते है क्योंकि बच्चों का मन बहुत कोमल और दुनिया दारी से परे होता है। उन्हें खुशी रहती है की त्योहार पर अच्छे अच्छे उपहार मिलेंगे, स्कूल आदि में छुट्टी रहेगी, दोस्तों के साथ खेलना कूदना होगा और चारों तरफ खुशियां देख बच्चे अधिक प्रसन्न रहते है।

पंजाब में होली को क्या कहकर पुकारा जाता है?


पंजाब में होला मोहल्ला के नाम से होली को पुकारा जाता हैं।

Holi Kyu Manate hai


होली हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है और होली धर्म की विजय और अधर्म की हार को दर्शाती है। होली के दिन भगवान ने भक्त के प्राणों की रक्षा की और राक्षसी होलिका का नाश हुआ।

होली कितने देशों में मनाई जाती है

होली एक भारतीय त्योहार है तो जहां भी भारतीय प्रवासी रहते है उन सभी जगह पर होली मनाई जाती है। होली भारत और नेपाल के अतिरिक्त मलेशिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका और यूरोप में भी ये मनाया जाने लगा है और केवल भारतीय परिवारों में ही मनाया जाता हैं।

होली का इतिहास क्या है

होली का इतिहास काफी पुराना है। इसके इतिहास की व्याख्या शुरू होती है सतयुग से।

सतयुग में राजा हिरण्यकश्यप नाम के राक्षस के घर एक पुत्र पैदा हुआ जिसका नाम प्रह्लाद था। विष्णु भक्त होने के कारण हिरण्यकश्यप उसका परम विरोधी था और उसे मारने के लिए उसने अनेक प्रयत्न किए जिनमें से एक बार उसने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को लेकर जलती चिता में बैठने को कहां क्योंकि उसकी बहन को वरदान था की कोई उसे जला नहीं पाएगा लेकिन उसने अपनी शक्ति का प्रयोग अधर्म के लिए किया इसलिए अग्नि ने उसे जलाकर भस्म कर दिया। इसी के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत हुई और इसी उपलक्ष्य में होली का त्यौहार मनाया जाता है।

एक अन्य कथा है यह द्वापर युग के समय की बात है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने राधा पर रंग डाला था और तब से होली खेली जाती है हालाकि वहां लट्ठमार होली खेलते है। इसके अतिरिक्त जब देवता और सम्पूर्ण सृष्टि की रक्षा करने के लिए काम देव द्वारा भगवान शिव को बाण मारा गया तो क्रोध में आकर भगवान शिव द्वारा काम देव को भस्म कर दिया गया था इसलिए इस दिन को काम देव के बलिदान के रूप में भी मनाया जाता है। ऐसी मान्यताएं दक्षिण भारत में प्रसिद्ध है और इस मान्यता के आधार पर भी होली मनाई जाती है। तो इतिहास बहुत पुराना है इस त्योहार का और हम सभी को इसके विषय में जानकारी अवश्य होनी चाहिए।

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Essay on Holi in Hindi का यह लेख अब यही पर खत्म होता है| मुझे उम्मीद है की आपको होली के बारे में जानकारी पढ़कर अच्छा लगा होगा.

आपको लेख कैसा लगा हमको कमेंट करके जरुर बताये और जितना हो सके इस लेख को फेसबुक, ट्विटर, गूगल+ और व्हाट्सएप्प पर शेयर करें| 🙂 आप सभी को हिमांशु ग्रेवाल की और से होली की हार्दिक शुभकामनाएँ..!

About the author

Himanshu Grewal

10Lines.co एक हिंदी ब्लॉग है, यहां आपको 10 Lines से संबंधित जानकारी मिलेगी। इसके अलावा निबंध (Essay), भाषण (Speech), कविता (Poem) भी पढ़ने को मिलेगा।

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