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मेरा प्रिय त्यौहार लोहड़ी पर निबंध

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विद्यालय में पढ़ रहे सभी बच्चों, बड़ों, अध्यापकों के लिए मैंने पंजाबियों का प्रमुख त्योहार लोहड़ी पर मैंने एक शानदार लोहड़ी पर निबंध लिखा है जिससे आप सभी को इस त्यौहार के बारे में अच्छे से पता चल सके।

प्रति वर्ष हम ना जाने कितने त्योहार मनाते हैं, कुछ तो ऐसे त्योहार होते हैं जो हमारी संस्कृति से जुड़े होते हैं वही कुछ त्योहार हम जानकारी प्राप्त करने के बाद मनाना शुरू करते हैं। जानकारी प्राप्त होने का अर्थ है जैसे जब हम विद्यालय जाना आरंभ करते हैं तो बाल दिवस, शिक्षक दिवस, गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्र दिवस जैसे कुछ नए त्योहारों के बारे में एक विद्यार्थी को मालूम पड़ता है। वहीं जब एक बालक और बड़ा होता है तब उसको और भी कई नए त्योहारों के बारे में मालूम पड़ता है, खास कर विश्व के दक्षिणी देशों में मनाए जाने वाले त्योहारों के बारे में जैसे कि क्रिसमस, न्यू ईयर, वेलेंटाइन डे इत्यादि।

इसी तरह से जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं हमें और भी कई नयी-नयी चीज़ों के बारे में मालूम पड़ता है, और हम उन चीजों को अपनी ज़िंदगी में उतारने का प्रयतन करते है। सिख धर्म में कई चर्चित त्यौहार है जैसे कि गुरु पर्व, बैसाखी, लोहड़ी और उनके दस गुरु जी के जन्म दिवस पर जयंती

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आइए, आज लोहड़ी के त्यौहार के बारे में विख्यात से जानते हैं, मेरे द्वारा अपडेट किए गए लोहड़ी 2021 पर निबंध को आप अपने विद्यालयों में ठंड कि छुट्टियों के बाद और वर्ष के पहले प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

Lohri Essay in Hindi 10 Lines

लोहड़ी पर निबंध को शुरू करने से पहले मैं अपनी वेबसाइट के सभी पाठकों से एक गुजारिश करना चाहता हूँ कि यदि मुझसे इस लेख में कुछ जरूरी बातें छूट जाती है तो आप कृपया कर मुझे टिप्पणी के माध्यम से बताना ना भूले, आपकी एक मदद के लिए मैं आपको पहले ही धन्यवाद बोल रहा हूँ। मैं आशा करता हूँ कि आप मेरी मदद जरूर करेंगे।

आप चाहे तो इस Lohri Essay को Speech on Lohri के तौर पर भी अपने स्कूल में हो रहे प्रतियोगिता के वक्त इस्तेमाल कर सकते हैं, और यदि आपको इस लोहड़ी पर निबंध के अलावा लोहड़ी पर भाषण चाहिए तो आप टिप्पणी करके बता सकते हैं। मैं जल्द ही आपके लिए एक लेख लोहड़ी पर स्पीच का भी तैयार करके अपडेट जरूर करूंगा।

तो चलिये अब चलते है लेख के उद्देश्य कि और जिसका उद्देश्य है आप तक लोहड़ी पर निबंध पहुँचाना।


Essay on Lohri in Hindi

Essay on Lohri in Hindi
Essay on Lohri in Hindi

लोहड़ी पर निबंध

पंजाब के लोग लोहड़ी को हर साल 13 जनवरी को पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि त्योहार उस दिन मनाया जाता है जब दिन छोटे होने लगते हैं और रातें लंबी होने लगती हैं। यह त्यौहार फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है और इस दिन लोग दुलारी बत्ती के सम्मान में खुशी में अलाव जलाते हैं, गाते हैं और नाचते हैं। हालाँकि, यह पंजाबियों का प्रमुख त्योहार है, लेकिन भारत के कुछ उत्तरी राज्य भी इस त्यौहार को मनाते हैं जिसमें हिमाचल प्रदेश और हरियाणा शामिल हैं।

सिंधी समुदाय के लोग इस त्योहार को “लाल लोई” “Lal Loi” के रूप में मनाते हैं। दुनिया के विभिन्न कोनों में रहने वाले पंजाबी लोग भी लोहड़ी को उसी उत्साह के साथ मनाते हैं। यहाँ लोहड़ी पर निबंध दिए गए हैं जो हमारे पाठकों को लोहड़ी उत्सव के विभिन्न पहलुओं को सिखाएंगे।

1. लोहड़ी मनाने के पीछे का कारण

पंजाब में लोहड़ी के त्यौहार को मनाने के बारे में लोगों की कई धारणाएँ हैं, जिनमें से कुछ शामिल हैं:

  • 👉 माना जाता है कि लोहड़ी शब्द लोई से लिया गया है, जो महान संत कबीर की पत्नी थी।
  • 👉 जबकि कुछ लोगों का मानना ​​है कि यह शब्द लोह से उत्पन्न हुआ है जो कि पत्तियों को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण है।
  • 👉 राज्य के कुछ हिस्सों में लोगों का यह भी मानना ​​है कि त्योहार का नाम होलिका की बहन के नाम से उत्पन्न हुआ, जो आग से बच गई जबकि होलिका की मृत्यु हो गई।
  • 👉 इसके अलावा, कुछ लोगों का यह भी मानना ​​है कि लोहड़ी शब्द की उत्पत्ति तिलोरी शब्द से हुई है जो रोरी और तिल शब्द के मेल से आता है।

यह त्योहार देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है और लोग इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

आंध्र प्रदेश में इसे भोगी नाम से मनाया जाता है। इसी तरह असम, तमिलनाडु और केरल में यह त्योहार क्रमशः माघ बिहू, पोंगल और ताई पोंगल के नाम से मनाया जाता है। दूसरी ओर यूपी और बिहार के लोग इसे मकर संक्रांति का उत्सव कहते हैं।

2. पंजाब में लोहड़ी कैसे मनाई जाती है?

भारत के लोग लोहड़ी को कई अन्य त्योहारों की तरह खुशी के साथ मनाते हैं। यह उन त्योहारों में से एक है जो परिवार और दोस्तों को एक साथ इकट्ठा होने और कुछ गुणवत्ता समय बिताने का अवसर देता है। लोहड़ी पर लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ जाते हैं और मिठाई बांटते हैं। यह त्यौहार किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे फसल का मौसम माना जाता है।

लोग अलाव जलाकर और नाचते-गाते और अलाव जलाते हुए त्योहार मनाते हैं। आग के चारों ओर गाते और नाचते समय, लोग पॉपकॉर्न, गुड़, रेवड़ी, चीनी-कैंडी और तिल फेंकते हैं।

  • इस दिन, शाम को हर घर में एक पूजा समारोह आयोजित किया जाता है। यह वह समय होता है जब लोग परिक्रमा करके और पूजा अर्चना करके सर्वशक्तिमान से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
  • रीति-रिवाजों के अनुसार इस दिन लोग सरसों के साग, गुड़, गजक, तिल, मूंगफली, फूलिया और प्रसाद के साथ मक्की की रोटी जैसे खाद्य पदार्थ खाते हैं। इसके अलावा लोग इस दिन नए कपड़े भी पहनते हैं और भांगड़ा करते हैं जो पंजाब का लोक नृत्य है।
  • किसानों के लिए, यह दिन एक नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।
  • नवविवाहित जोड़े और नवजात शिशुओं के लिए भी यह त्योहार बहुत महत्व रखता है। इस दिन नवविवाहित दुल्हनों को परिवार के सभी सदस्यों से उपहार मिलते हैं और वे सभी गहने पहनने वाले होते हैं जो दुल्हन आमतौर पर अपने विवाह के दिन पहनते हैं।

3. Lohri Celebration in Hindi

पहले लोग एक दूसरे को गजक गिफ्ट करके लोहड़ी मनाते थे, जबकि समकालीन दुनिया में अब धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है और लोग गजक के बजाय चॉकलेट और केक गिफ्ट करना पसंद करते हैं। बढ़ते प्रदूषण एजेंटों के साथ पर्यावरण के लिए बढ़ते खतरे के साथ लोग अधिक जागरूक हो गए हैं और वे अलाव नहीं जलाना पसंद करते हैं। लोहड़ी पर आग जलाने के लिए लोग अधिक पेड़-पौधों को काटने से बचते हैं। इसके बजाय वे अधिक से अधिक पेड़ लगाकर लोहड़ी मनाते हैं ताकि वे लंबे समय में पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकें।

मैंने आपके लिए Lohri Festival Essay in Hindi Language में लिख दिया है। अब मैं आपके साथ लोहड़ी पर दूसरा निबंध साझा करने जा रहा हूँ।


लोहड़ी पर निबंध

Lohri Festival Essay in Hindi
Lohri Festival Essay in Hindi

Essay on Lohri in Hindi For Class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12

मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व यानी 13 जनवरी (क्योंकि मकर संक्रांति प्रति वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है) उत्तर भारत विशेषत: पंजाब में लोहड़ी का त्यौहार सिख धर्म के व्यक्तियों द्वारा बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। किसी न किसी नाम से मकर संक्रांति के दिन या उससे आस-पास भारत के विभिन्न प्रदेशों में कोई न कोई त्यौहार अवश्य ही मनाया जाता है।

(यदि आप भारत के बाहर से बैठ के मेरे इस लेख को पढ़ रहे हैं तो दोस्तों मैं आपको बताना चाहता हूँ कि भारत में कई ऐसे त्योहार है जिनकी कोई फिक्स दिन नहीं होता है, कहने का अर्थ है तिथि फिक्स नहीं है जैसे कि दशहरा, दिवाली, होली आदि परंतु लोहड़ी के त्योहार का दिन फिक्स है।)

मकर संक्रांति के दिन यानि 14 जनवरी को तमिल हिंदू पोंगल का त्यौहार मनाते है, वहीं बिहार और उत्तर-प्रदेश में मकर संक्रांति को तिल सकरात के नाम से दही, तिल से बनी मिठाई जिसको कि तिलकुट कहा जाता है और चिउड़ा को खाकर मनाया जाता है। इस प्रकार लगभग पूर्ण भारत में यह विविध रूपों में मनाया जाता है। मकर संक्रांति की पूर्व संध्या को पंजाब, हरियाणा व पड़ोसी राज्यों में बड़ी धूम-धाम से लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है। पंजाबियों के लिए लोहड़ी खास महत्व रखती है।

लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही छोटे बच्चे लोहड़ी के गीत गाकर लोहड़ी हेतु लकड़ियां, मेवे, रेवड़ियां, मूंगफली इकट्ठा करने लग जाते हैं। लोहड़ी की संध्या को उन जमा की गई लकड़ियों को एक जगह रख कर उनमें आग जलाई जाती है। सभी लोग अग्नि के चारों और चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं व आग में रेवड़ी, मूंगफली, खील, मक्की के दानों की आहुति देते हैं। आग के चारों और बैठकर लोग आग सेकते हैं व रेवडी, खील, गज्जक, मक्का खाने का आनंद लेते हैं।

लोहड़ी के त्योहार पर जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चा हुआ हो उन्हें विशेष तौर पर बधाई दी जाती है। प्राय: घर में नववधू या और बच्चे की पहली लोहड़ी बहुत विशेष होती है। लोहड़ी को पहले तिलोड़ी कहा जाता था। यह शब्द तिल तथा रोटी (गुड़ की रोटी) शब्दों के मेल से बना है, जो समय के साथ बदल कर लोहड़ी के रुप में प्रसिद्ध हो गया। शायद आपको मालूम हो की आज दुनिया में जीतने भी त्योहार मनाए जाते हैं उनका कोई ना कोई ऐतिहासिक संदर्भ: जरूर रहता है, ठीक उसी प्रकार लोहड़ी का भी कुछ न कुछ ऐतिहासिक संदर्भ: जरूर रहा है, आइए अब जानते हैं लोहड़ी का ऐतिहासिक संदर्भ:


लोहड़ी का ऐतिहासिक संदर्भ

किसी समय में सुंदरी एवं मुंदरी नाम की दो अनाथ लड़कियां थी जिनको उनका चाचा विधिवत शादी (यानी कि पूरे रस्मों एवं रिवाजों के साथ) न करके एक राजा को भेंट (यानिकी बेचना) कर देना चाहता था। उसी समय में दुल्ला भट्टी नाम का एक नामी डाकू हुआ करता था। उसने दोनों लड़कियों, सुंदरी एवं मुंदरी को जालिमों से छुड़ा कर उन की शादियां की।

इस मुसीबत की घड़ी में दुल्ला भट्टी ने लड़कियों की मदद की और लड़के वालों को मना कर एक जंगल में आग जला कर सुंदरी और मुंदरी का विवाह करवाया। दूल्हे ने खुद ही उन दोनों का कन्यादान किया। कहते हैं दूल्हे ने शगुन के रूप में उनको शक्कर दी थी। जल्दी-जल्दी में शादी की धूमधाम का इंतजाम भी न हो सका तो दूल्हे ने उन लड़कियों की झोली में एक सेर शक्कर डालकर ही उनको विदा कर दिया।

भावार्थ यह है कि ड़ाकू हो कर भी दुल्ला भट्टी ने निर्धन लड़कियों के लिए पिता की भूमिका निभाई।


लोहड़ी की एक कहानी तो यह थी वहीं दूसरी और यह भी कहा जाता है कि संत कबीर की पत्नी लोई की याद में यह पर्व मनाया जाता है, इसीलिए इसे लोई भी कहा जाता है और इस प्रकार यह त्योहार पूरे उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है।


लोहड़ी का इतिहास

यदि हम इस पर्व का इतिहास देखें तो इसके पीछे कई मान्यताएं जुड़ी हुई है जिनके आधार पर लोहड़ी पर्व का पूजन किया जाता है।

👉 एक पौराणिक मान्यता के मुताबिक लोहड़ी का पर्व संत कबीर दास की पत्नी लोई की याद में मनाया जाता है।

👉 इसके अलावा इस पर्व के पीछे एक और मान्यता यह जुड़ी हुई है कि पंजाब में इस पर्व को पहले लोह के नाम से भी जाना जाता था जो अग्नि के प्रकाश और ऊष्मा का प्रतीक है

👉 कुछ लोग यह भी मानते हैं कि लोहड़ी होलिका की बहन थी लेकिन लोहड़ी का स्वभाव अत्यंत दयालु और नेक था जिस वजह से यह पर्व उनकी याद में मनाया जाता है।

👉 इस पर्व से जुड़ी एक विशेष मान्यता यह है कि लोहड़ी दुल्ला भट्टी नामक व्यक्ति की याद में यह पर्व मनाया जाता है। कहा जाता है कि एक समय था जब मुगल काल में लड़कियों की कालाबाजारी की जाती थी और दुल्ला भट्टी नामक व्यक्ति लोगों को लूटा करता था। लेकिन उस व्यक्ति में एक बहुत अच्छी बात थी कि वह कालाबाजारी को स्वीकार नहीं करता था इसलिए जिन अमीरों या मुगलों को उच्च दाम पर व्यापारियों द्वारा निर्दोष लड़कियों को बेचा जा रहा था। उन्हें छुड़ाने के लिए दुल्ला भट्टी आगे आया और कई परिवार की लड़कियों को आजाद करा कर उनकी शादियां हिंदू लड़कों से करवाई और इस तरह लोहड़ी का पर्व दुल्ला भट्टी को समर्पित है और इस मौके पर एक चर्चित गीत दुल्ला भट्टी गाया जाता है।


10 Lines on Lohri Festival in Hindi
  1. लोहड़ी सिख समुदाय का एक प्रसिद्ध त्योहार है जिसे सर्दियों के मौसम में मनाया जाता है।
  2. पंजाब ही नहीं, बल्कि भारत के अन्य राज्यों हरियाणा, दिल्ली तथा विदेशों में भी सिख समुदाय द्वारा इस पर्व को मनाया जाता है।
  3. लोहड़ी पर्व नागरिकों में ऊर्जा और खुशी की भावना का संचार करता है। अतः इसे प्रमुख त्योहारों में गिना जाता है।
  4. लोहड़ी के मौके पर देश के विभिन्न राज्य जैसे हरियाणा, पंजाब एवं दिल्ली में सार्वजनिक अवकाश होता है।
  5. गजक, मक्के की रोटी, सरसों का साग लोहड़ी पर्व का पारंपरिक व्यंजन है।
  6. अलाव के चारों ओर उपस्थित लोगों द्वारा इस पर्व पर गजक, मूंगफली, रेवड़ी इत्यादि आनंद के साथ खाकर इस पर्व को मनाया जाता है।
  7. मान्यता है लोहड़ी पर्व लोई के नाम से पड़ा, लोई महान संत कबीर दास की पत्नी थी।
  8. यह पर्व साल की शुरुआत में शिशिर ऋतु (सर्दियों) के अंत में मनाया जाता है।
  9. इस पर्व को साल की एक नई शुरुआत के तौर पर भी मनाया जाता है। इसलिए नए साल के जश्न से अधिक पंजाब में पर्व पर धूमधाम देखने को मिलती है।
  10. कृषकों के लिए भी लोहड़ी का पर्व बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि फसल के पकने के बाद कटाई यहां से शुरू होती है।
लोहड़ी की पार्टी कैसी होती है?

अन्य त्योहारों की तरह ही लोहड़ी की पार्टी विशेष अंदाज में होती है। इस मौके पर लोगों द्वारा लोहड़ी पूजन के लिए आग जलाई जाती है और फिर उसके चारों ओर घेरा बनाकर नाच गाना कार्यक्रम किया जाता है। इस मौके पर गिद्दा, भांगड़ा डांस देखा जाता है और मूंगफली या रेवड़ी, गजक इत्यादि खाकर मुंह मीठा किया जाता है। लोहड़ी पूजन के बाद यह सभी चीजें प्रसाद के रूप में एक दूसरे के घर जाकर वितरित की जाती हैं। और इस प्रकार लोगों द्वारा एक दूसरे को लोहड़ी की हार्दिक बधाइयां दी जाती है। केवल सिख भी नहीं बल्कि कई हिंदू समुदाय के लोग भी हर्षोल्लास के साथ इस पर्व में शामिल होते हैं।


लोहड़ी की आग में क्या डाला जाता है?

लोहड़ी पर्व पर आग जलाकर लोहड़ी का पूजन किया जाता है। इस आग में ड्राई फ्रूट जैसे गजक, मूंगफली, पॉपकॉर्न, रेवड़ी इत्यादि डाली जाती है और ईश्वर से सुख समृद्धि की कामना लोगों द्वारा की जाती है।


लोहड़ी पर भाषण: Lohri Speech in Hindi

नमस्कार, मेरा नाम ____ (अपना नाम लिखे) है। आज मैं यहां आपके समक्ष आनंद, ऊर्जा का प्रतीक कहे जाने वाले लोहड़ी पर्व के विषय पर एक लघु भाषण सुनाने जा रहा हूं। आशा करता हूं यह आपको पसंद आएगा।

लोहड़ी पंजाब का प्रसिद्ध त्योहार है जिसे शिशिर ऋतु में मनाया जाता है, साल की शुरुआत में मनाए जाने वाले इस पर्व के मौके पर लोगों द्वारा लकड़ियों, उपलों से आग का घेरा बनाकर लोहड़ी पूजन किया जाता है। इस मौके पर देश के विभिन्न शहरों, ग्रामीण इलाकों में आनंद का माहौल होता है। बच्चों द्वारा इस पर्व की तैयारी 1 माह पूर्व से ही शुरु कर दी जाती है।

लोहड़ी पर्व के बाद अगला दिन मकर संक्रांति का होता है। सर्दियों की कड़क ठंड में लोग आग के चारों ओर खड़े होकर आग सेकते हैं। लोगों द्वारा रेवड़ी, मूंगफली, गजक इत्यादि बांटकर खाई जाती है और बड़े ही हर्षोल्लास के साथ यह पर्व मनाया जाता है। श्रद्धालु लोहड़ी के अगले दिन पवित्र स्नान कर घर वापस लौटते हैं।

भारत ही नहीं अपितु कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों द्वारा इस पर्व की महत्वता को समझते हुए आज भी यह मनाया जाता है। भले ही आज आधुनिकता के साथ इस पर्व को मनाया जाता है। लेकिन आज भी पंजाब के अनेक स्थानों और कृषक वर्ग द्वारा पारंपरिक अंदाज में इस पर्व को मनाया जाता है। इस दिन किसान बेहद खुश दिखाई देते हैं, क्योंकि फसल के पकने का समय हो चुका होता है, और फसल कटाई से पूर्व ही यह त्यौहार मनाया जाता है।

इन्हीं अंतिम शब्दों के साथ यहां मैं अपने भाषण को विराम देना चाहूंगा। आप सभी को मेरी तरफ से 2021 में लोहड़ी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!!


यह था लोहड़ी पर निबंध, जिसमें आपको लोहड़ी किस तरह से मनाई जाती है साथ में लोहड़ी मनाने के पीछे की वजह भी मालूम हुई होगी।

मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको Speech on Lohri का लेख पढ़ कर अच्छा लगा होगा, साथ ही में आप इस लेख को सोशल मीडिया की मदद से अपने दोस्तों एवं भाई-बहनों के साथ शेयर भी अवश्य ही करेंगे।

Essay on Lohri Festival के इस लेख को अंत तक पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद, आपको यह लेख कैसा लगा हमे कमेंट के माध्यम से बताना मत भूलिएगा। त्यौहार शब्द का अर्थ ही होता है एक साथ मिल जुल के प्यार से खुशियाँ बाँटना, तो हंसते मुस्कुराते रहिए और सभी त्योहार को मनाते रहिए।

लोहड़ी का त्योहार⇓

पोंगल⇓

मकर संक्रांति⇓

लोहड़ी पर निबंध

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