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पंजाबियों का पवित्र त्यौहार लोहड़ी पर निबंध

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नमस्ते, 10Lines.co में आज हम लोहड़ी पर निबंध अर्थात “in English Lohri Essay in Hindi” के विषय पर चर्चा करने जा रहे है तो लेख को अंत तक पूरा पढ़ें और लोहड़ी का त्यौहार कहां मनाया जाता है, लोहड़ी का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?, लोहड़ी का क्या अर्थ है? और लोहड़ी का पर्व कब व किस प्रकार मनाया जाता है? इत्यादि की जानकारी प्राप्त करें और लोहड़ी के विषय में जाने। अब हम अपने लेख को पढ़ना शुरू करते हैं।

Lohri Essay in Hindi 10 Lines

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कृपया ध्यान दें: स्कूल और कॉलेज के बच्चे इस लेख में से मुख्य पंक्तियों को चुन कर आने वाले लोहड़ी 2022 पर अपने विद्यालय में इसे याद करके बोल सकते है। लोहड़ी शायरी 2022 पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

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भारत एक ऐसा देश है जिसमें अत्यधिक त्यौहार मनाये जाते हैं, और कई जगह तो एक ही त्यौहार को कई नाम से भी जाना जाता है। आज हम भारत के मुख्य त्योहारों में से एक की इस लेख में विशेष चर्चा करेंगे।


लोहड़ी पर निबंध: Essay on Lohri in Hindi

लोहड़ी का पर्व पंजाबियों तथा हरियाणा लोगों का प्रमुख त्यौहार माना जाता है। यह त्यौहार मकर संक्रान्ति के एक दिन पहले यानी की 13 जनवरी को बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है। मकर संक्रान्ति की पूर्वसंध्या पर इस त्यौहार का उल्लास रहता है। रात्रि में खुले स्थान में परिवार और आस-पड़ोस के लोग मिलकर, लकड़ी एक्कठी करके आग जलाते हैं और फिर उसके किनारे घेरा बना कर बैठते हैं।

आधुनिक युग में अब यह लोहड़ी का त्यौहार सिर्फ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू काश्मीर और हिमांचल में ही नहीं अपितु बंगाल तथा उड़ीसा लोगों द्वारा भी मनाया जा रहा हैं।

लोहड़ी का त्यौहार: (परिचय)

चलिए जानते है कि आखिर इस त्यौहार का नाम लोहरी ही क्यों पड़ा?

लोहड़ी हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से पौष के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद (माघ संक्रांति से पहली रात) को यह पर्व मनाया जाता है। यह त्यौहार प्रतिवर्ष 13 जनवरी को ही पड़ता है। यह त्यौहार मुख्यत: पंजाब का पर्व है। प्राय: घर में नववधू और बच्चे की पहली लोहड़ी बहुत विशेष होती है। लोहड़ी को पहले तिलोड़ी कहा जाता था। यह शब्द तिल तथा रोड़ी (गुड़ की रोड़ी) शब्दों के मेल से बना है, जो समय के साथ बदल कर लोहड़ी के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

इस त्यौहार में शब्द – लोहड़ी की पूजा के समय व्यवहृत होने वाली वस्तुओं के द्योतक वर्णों का समुच्चय जान पड़ता है, जिसमें ल (लकड़ी) + ओह (गोहा = सूखे उपले) + ड़ी (रेवड़ी) = ‘लोहड़ी’ के प्रतीक हैं।

ल (लकड़ी) +ओह (गोहा = सूखे उपले) +ड़ी (रेवड़ी) = ‘लोहड़ी’

श्वतुर्यज्ञ का अनुष्ठान मकर संक्रांति पर होता था, संभवत: लोहड़ी उसी का अवशेष है।

दोस्तों, उत्तरी भारत की सर्दी पूरे भारत में चर्चित है, (जनवरी) पूस-माघ की कड़कड़ाती सर्दी से बचने के लिए आग भी सहायक सिद्ध होती है। यही व्यावहारिक आवश्यकता ‘लोहड़ी’ को मौसमी पर्व का स्थान देती है।


History of Lohri in Hindi

लोहड़ी त्यौहार से संबद्ध परंपराओं एवं रीति-रिवाजों से ज्ञात होता है कि प्रागैतिहासिक गाथा भी इससे जुड़ गई हैं। दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि-दहन की याद में ही यह अग्नि जलाई जाती है। यज्ञ के समय अपने जमाता शिवजी का भाग न निकालने का दक्ष प्रजापति का प्रायश्चित इसमें दिखाई पड़ता है। यह भी कहा जाता है कि संत कबीर की पत्नी लोई की याद में यह पर्व मनाया जाता है, इसीलिए इसे लोई भी कहा जाता है। इस प्रकार यह त्योहार पूरे उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है।

Information About Lohri Festival in Hindi

क्या आप जानते है कि लोहड़ी का त्यौहार विवाहित बेटियों के लिए खास है?

इस अवसर पर विवाहित पुत्रियों को माँ के घर से ‘त्योहार’ पर विशेष चीजे (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फलादि, इत्यादि) भेजी जाती है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में ‘खिचड़वार’ और दक्षिण भारत के ‘पोंगल पर भी-जो ‘लोहड़ी’ के समीप ही मनाएं जाते हैं – बेटियों को भेंट जाती है।

उत्तरी भारत में किस तरह से मनाया जाता है लोहड़ी का त्यौहार

लोहड़ी के त्यौहार से 20-24 दिन पहले ही बालक एवं बालिकाएं लोहड़ी के लोकगीत गाकर लकड़ी और उपले इकट्ठे करते हैं। संचित सामग्री से चौराहे या मोहल्ले के किसी खुले स्थान पर आग जलाई जाती है। मोहल्ले या गांव भर के लोग अग्नि के चारों ओर आसन जमा लेते है। घर और व्यवसाय के कामकाज से निपटकर प्रत्येक परिवार अग्नि की परिक्रमा करते है।

लोहड़ी के दिन या उससे दो चार दिन पूर्व बालक बालिकाएं बाजारों में दुकानदारों तथा पथिकों से ‘मोह माया’ या महामाई (लोहड़ी का ही दूसरा नाम) के पैसे मांगते है, इनसे लकड़ी एवं रेवड़ी खरीदकर सामूहिक लोहड़ी में प्रयुक्त करते हैं।

लोहड़ी का प्रसाद

Lohri Ka Prasad
Lohri Ka Prasad

रेवड़ी (और कहीं कहीं मक्के के भुने दाने) अग्नि की भेंट किए जाते हैं तथा ये ही चीजें प्रसाद के रूप में सभी उपस्थित लोगों को बांटी जाती हैं। घर लौटते समय ‘लोहड़ी’ में से दो चार दहकते कोयले, प्रसाद के रूप में, घर पर लाने की प्रथा भी है। जिन परिवारों में लड़के का विवाह होता है अथवा जिन्हें पुत्र प्राप्ति होती है, उनसे पैसे लेकर मोहल्ले या गांव भर में बच्चे ही बराबर-बराबर रेवड़ी बाटे जाते हैं।

बच्चों द्वारा की जाने वाली शरारतें लोहड़ी के त्यौहार पर

शहरों के शरारती लड़के दूसरे मोहल्ले में जाकर लोहड़ी से जलती हुई लकड़ी उठाकर अपने मोहल्ले की लोहड़ी में डाल देते हैं। यह लोहड़ी व्याहना कहलाता है। महंगाई के कारण पर्याप्त लकड़ी और उपलों के अभाव में दुकानों के बाहर पड़ी लकड़ी की चीजें उठाकर जला देने की शरारतें भी चल पड़ी हैं।

लोहड़ी का त्यौहार और दुल्ला भट्टी की कहानी

लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की एक कहानी से भी जोड़ा जाता हैं। लोहड़ी की सभी गानों को दुल्ला भट्टी से ही जुड़ा तथा यह भी कह सकते है कि लोहड़ी के गानों का केंद्र बिंदु दुल्ला भट्टी को ही बनाया जाता हैं।

दुल्ला भट्टी कौन है?

दुल्ला भट्टी मुगल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उसे पंजाब के नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उस समय संदल बार के जगह पर लड़कियों को गुलामी के लिए बल पूर्वक अमीर लोगों को बेचा जाता था जिसे दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत लड़कियों को न की मुक्त ही करवाया बल्कि उनकी शादी भी हिन्दू लड़कों से करवाई और उनके शादी की सभी व्यवस्था भी करवाई।

दुल्ला भट्टी एक विद्रोही था और उनकी वंशावली भट्टी राजपूत थे। उसके पूर्वज पिंडी भट्टियों के शासक थे जो की संदल बार में था। अब संदल बार पाकिस्तान में स्थित है वह सभी पंजाबियों का नायक था।

लोहड़ी कैसे मनाते हैं?

लोहड़ी पर्व मूंगफली खाकर, गाने गाकर और परिवार और प्रियजनों के साथ एक आग की गर्माहट को साझा करने का एक खुशी का समय है। लोहड़ी से एक हफ्ते पहले, बच्चे जलाने के लिए लकड़ी इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं। अच्छे स्वभाव की प्रतिद्वंद्विता की भावना समुदाय को एक साथ बांधती है और हर कोई अपने पड़ोस में सबसे बड़ी और सबसे भव्य आग बनाने में गर्व महसूस करता है।

  • लोहड़ी की शाम में, अलाव की आग तेज होती है और इस सर्द रात में लोगों को गर्मी से घेर देती है। लकड़ी की दरारें और जलती है और लोग चारों ओर इकट्ठा होते हैं, उनके चेहरे लाल और सोने से चमकते हैं।
  • लोहड़ी मूल रूप से सूर्य देव को समर्पित त्योहार है। जैसे-जैसे सूर्य उत्तरायण की ओर बढ़ता है, नया विन्यास धरती मां को गर्माहट प्रदान करता है। वे बीज जो गर्मी की चाह में सुप्त रहते हैं, अब अंकुरित होते हैं।
  • लोहड़ी एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो पूरे समुदाय को एक साथ लाता है, प्रत्येक परिवार तिल और गुड़, मूंगफली और कई अन्य स्वादिष्ट घर से बने व्यंजनों में मिठाई का योगदान देता है।
  • गुरु ग्रंथ साहिब महीने के इस शुभ समय की प्रशंसा करते है और कहते है कि जो लोग आग लगाने से पहले ध्यान करते हैं वे धन्य होंगे।
  • लोहड़ी, जो सर्दियों में उच्चतम बिंदु को चिह्नित करता है, विशेष रूप से नवजात शिशुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो आग के चारों ओर ले जाते हैं।
  • वे समृद्धि के लिए प्रार्थना करते है। यहां तक ​​कि वे जलते हुए अंगारों को तिल (गिंगेली), मूंगफली (मूंगफली) और चिरावा (पीटा चावल) का प्रसाद बनाते हैं।
  • पौराणिक कथा के अनुसार, एक अच्छा लोहड़ी पूरे वर्ष के लिए स्वर सेट करता है – जितना अधिक खुशी और भरपूर अवसर होगा, उतना ही शांति और समृद्धि होगी।
  • कुछ लोगों का मानना ​​था कि होलिका और लोहड़ी बहने थी। जबकि पूर्व आग में गायब हो गया, लोहड़ी बच गया और जीवित रहा।
  • लोहड़ी से जुड़े अनुष्ठान और उत्सव केवल प्रकृति के लिए एक सामान्य धन्यवाद के प्रतीक हैं, जैसा कि सूर्य देव ने दर्शाया है, और इस प्रक्रिया में, उत्सव परिवार के पुनर्मिलन और मिलनसार होने के साथ भाईचारे, एकता और कृतज्ञता की भावना का प्रतीक है, जिससे बहुत सारी खुशियाँ पैदा होती हैं।
  • सद्भावना और जयकार। यह एक दिन भी है जब महिलाओं और बच्चों का ध्यान जाता है। किसी दुल्हन की पहली लोहड़ी बेहद महत्वपूर्ण होती है। एक नवजात शिशु की पहली लोहड़ी, चाहे वह लड़की हो या लड़का, समान रूप से महत्वपूर्ण है। बच्चे घर-घर जाकर गायन करते है और लोहड़ी का प्रसाद मांगते हैं।

FAQs

पंजाब का प्रमुख त्यौहार कौन सा है?

पंजाब में कई पर्व मनाएं जाते है जो काफी प्रमुख है। जैसे की लोहड़ी, होला मोहल्ला, बैसाखी, माघी, दिवाली, गुरूपर्व, टीका, तीज, बसंत पंचमी इत्यादि।

लोहड़ी

लोहड़ी पंजाबियों का प्रमुख त्योहार है जो प्रत्येक वर्ष 13 जनवरी के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार मकर संक्रांति के ठीक एक दिन बाद पंजाब के अलावा भारत के कई प्रदेशों में मनाया जाता है।

होला मोहल्ला

होला मोहल्ला पंजाब के प्रमुख त्योहार में से एक है। इसे ‘रंगों का त्योहार’ के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसको होली के त्योहार के एक दिन बाद मनाया जाता है। यह त्योहार मार्शल आर्ट “कुश्ती” के प्रदर्शन करने के लिए भी मनाया जाता हैं।


लोहड़ी का त्यौहार कहां मनाया जाता है?

लोहड़ी का त्योहार भारत के कई प्रदेशों में मनाया जाता है जिसमें उत्तर भारत भी सम्मिलित है परंतु मुख्यत: लोहड़ी पंजाब और हरियाणा में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता हैं। यह पर्व मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता हैं।


लोहड़ी कब है 2022 में?

पंजाबियों का लोकप्रिय पर्व लोहड़ी जो प्रत्येक वर्ष जनवरी के महीने में मनाया जाता है। आइए जानते है वर्ष 2022 में लोहड़ी कब है?

Lohri 2022 Date 13 January 2022
Lohri Date 2023 13 January 2023
Lohri 2024 Date 13 January 2024

मित्रों, Lohri Festival Essay in Hindi का यह लेख अब यही समाप्त होता है। उम्मीद है कि आपको लोहड़ी पर जानकारी मिली होगी। आपको यह लेख कैसा लगा? आप हमें कमेंट के माध्यम से बता सकते हो और इस लेख को आप फेसबुक, व्हाट्सएप्प और ट्विटर पर शेयर करके सभी को लोहड़ी की शुभकामनाएं दे सकते हो। आप सभी को 10Lines.co की तरफ से लोहड़ी 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं!

– Lohri Essay in Hindi 2022

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