Advertisement

Ganesh Chaturthi 2021: गणेश चतुर्थी का महत्व, निबंध इतिहास और विनायक चतुर्थी व्रत विधि कथा आरती

Happy Ganesh Chaturthi in Hindi के इस लेख में आज मैं आपको भगवान गणेश जी के जीवन से जुड़ी वह सारी रहस्यमय जानकारी बताऊंगा जिसको पढ़कर आप बहुत प्रसन्न होंगे और गणेश जी के प्रति आपका प्यार और आपकी निष्ठा सदा ही बनी रहेगी।

भगवान के इस लेख में, आज मैं आपको गणेश जी के जीवन से जुड़ी कथा, Shri Ganesh Ki Kahani, Vinayaka Chavithi Katha, गणेश चतुर्थी के दिन व्रत में किन चीजों का ध्यान रखें, इस दिन क्या करें और क्या न करें, Ganesh Chaturthi History in Hindi, Vinayaka Vratha Katha अथवा गणेश मंत्र के बारे में बताऊंगा जिसका जाप करके गणेश चतुर्थी की पूजा विधि अच्छे से सम्पन्न हो सके।

श्री गणेश जी की सारी जानकारी प्राप्त करने के बाद हमको कमेंट करके जरूर बताये की आपको यह जानकारी कैसी लगी और अगर आपको यह जानकारी पसंद आई तो भगवान के इस लेख को आप सोशल मीडिया पर शेयर अवश्य करें।

आओ, प्यारे भक्तों Ganesh Chaturthi in Hindi and Ganesh Essay in Hindi की जानकारी को पढ़ना प्रारंभ करते है। इसको भी पढ़े ⇒ गणेश चतुर्थी के दिन किन-किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए

About Ganesh in Hindi

गणपति बप्पा मोरिया
श्री गणेश चालीसा

Information About Ganesh Chaturthi in Hindi

Ganesh Chaturthi
Ganesh Story in Hindi

Ganesh Chaturthi Story in Hindi

भगवान श्री गणेश के नाम अनेक है जैसे गजानन, विघ्नेश्वर, गोरी पुत्र आदि। हिन्दू धर्म में श्री गणेश अधिपति है और उन्हें अग्र-पूजा का मान है। गणेश चतुर्थी का व्रत करने से घर – परिवार में आ रही विघ्न और विपदा का अंत हो जाता है। कई दिनों से रुके मांगलिक कार्य सम्पन्न होते है और भगवान श्री गणेश जी की असीम सुख की प्राप्ति होती हैं।

इस दिन गणेश कथा पढ़ने और सुनने का विशेष महत्व होता है। व्रत करने वालों को इस दिन यह कथा अवश्य पड़नी चाहिए तभी व्रत का सम्पूर्ण फल मिलता है। पौराणिक गणेश कथा के अनुसार एक बार देवता कई विपदाओं से गिरे हुए थे तब वह मदद मांगने के लिए भगवान शिव के पास गए उस दिन शिवजी के साथ कार्तिक और गणेश जी भी बैठे थे। देवताओं की बात सुनकर भगवान शिवजी ने कार्तिक और गणेश जी से पूछा तुम दोनों में से कौन देवताओं के कष्टों का निवारण कर सकता है। तब कार्तिकेय और गणेश जी दोनों ने ही इस कार्य के लिए अपने को सक्षम बताया।

इस पर शिव जी ने दोनों की परीक्षा लेते हुए कहा की तुम दोनों में से जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके आयेगा वही देवताओं के साथ मदद के लिए जायेगा।

भगवान शिवजी के वचनों को सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठ कर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गये परन्तु गणेश जी सोच में पड़ गये कि वह चूहे के ऊपर चढ़ कर पृथ्वी की परिक्रमा करेंगे तो इस कार्य में उन्हें बहुत समय लग जायेगा। तब उन्हें एक उपाय सूजा और गणेश जी अपने स्थान से उठे और अपने माता-पिता की सात बार परिक्रमा करके वापस बैठ गये। परिक्रमा करके आने पर कार्तिकेय स्वयं को विजेता बताने लगे। शिव जी ने गणेश जी से पृथ्वी की परिक्रमा करने का कारण पूछा तब गणेश जी ने कहा माता पिता के चरणों में ही समस्त लोक है। यह सुनकर शिव जी ने गणेश जी को देवताओं के संकट को दूर करने की आज्ञा दी।

इस प्रकार भगवान शिव जी ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया कि जो भी गणेश चतुर्थी के दिन तुम्हारी पूजा करेगा और रात्रि में चंद्रमा को अग्र देगा उसके तीनों ताप यानी दैहिक ताप, दैविक ताप और भौतिक ताप दूर होंगे। इस व्रत को करने से व्रत धारी के सभी दुःख दूर होंगे और उसे जीवन के भौतिक सुखों की प्राप्ति होगी। गणेश चतुर्थी के इस शुभ अवसर पर आज हम जानेंगे की क्या करना चाहिए और क्या नहीं, आइये जानते है।

grammarly

गणेश चतुर्थी के उपाय: गणेश चतुर्थी के दिन क्या करें?

  1. 👉 भगवान श्री गणेश के पूजन में मोदक का भोग जरूर लगाना चाहिए। (जन्म से ही माता श्री गणेश को मोदक खिलाती थी जोकि श्रीगणेश को बहुत अधिक प्रिय है। इसलिए आप भी जब गणेश पूजन करें तो मोदक का भोग जरूर लगाये।)
  2. 👉 गणेश जी को गेंदे का फूल बहुत अधिक प्रिय है इसलिए जब भी गणेश पूजन करें तो गेंदे के फूल का प्रयोग करें।
  3. 👉 एक समय दैत्य अन्लासुर के आतंक को दूर करने के लिए श्री गणेश ने अन्लासुर को निगल लिया और उसे अपने उदर में भस्म कर दिया। इससे श्री गणेश के उदर में बहुत अधिक अग्नि और असहनीय दर्द उत्पन्न हुआ। इस पीड़ा को दूर करने के लिए कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठ औषधि के रूप में श्री गणेश को दी और गणेश जी की उदर पीड़ा ठीक हो गई। तब से गणेश जी को दूर्वा चढ़ाई जाती है। इसलिए गणेश चतुर्थी पर आप भी गणेश जी को दूर्वा अवश्य चढ़ाएं।
  4. 👉 शंख ध्वनि श्री गणेश को बहुत प्रसन्न करती है। शंख ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन गणेश पूजा करते समय शंख नाद जरूर करें।
  5. 👉 5 प्रकार के फलों में केला जरूर चढ़ाएं। श्री गणेश को केला बहुत पसंद है।

गणेश चतुर्थी के टोटके: गणेश चतुर्थी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

  • भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चन्द्रमा के दर्शन नहीं करना चाहिए। चंद्रमा ने इस दिन श्री गणेश को देखकर उनका उपहास किया था जिसके चलते श्री गणेश जी ने चंद्रमा के अहंकार को तोड़ने के लिए उन्हें श्राप दिया और कहां की जो इंसान या जो व्यक्ति आज के दिन तुम्हे देखेगा उस पर झुटा आरोप लगेगा और वह निंदा का पात्र बनेगा।
  • भगवान गणेश जी में पूरी दुनिया वाश करती है चाहे वह शुभ हो या अशुभ। भगवान गणेश के सामने खड़े होकर जब हम वंदना करते है तो हमें रिद्धि – सिद्धि, शुभ-लाभ और सभी आशीर्वाद प्राप्त होते है। लेकिन पीठ दर्शन से हमें दरिद्रता प्राप्त होती है। क्योकि श्री गणेश जी की पीठ पर दरिद्रता का वाश रहता है। इसलिए कभी भी श्री गणेश के पीठ दर्शन नहीं करना चाहिए।
  • भगवान श्री गणेश पर कभी भी तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए। इससे घोर विपदा आती है और मान हानि होती है।
  • घर के मंदिर में गणेश जी की खड़ी हुई कोई मूर्ति नहीं रखनी चाहिए और जहाँ मूर्ति रखे वहाँ बिना आसन के नहीं रखे इससे घर पर घोर संकट आता है।
  • गणेश जी की मूर्ति कभी भी घर में विसम संख्या में नहीं रखना चाहिए इससे घर का नाश हो जाता है। उदाहरण 1, 3 और 5. गणेश जी की मूर्ति सदैव घर में सम संख्या में होनी चाहिए। उदाहरण 2, 4 और 6.

इस गणेश चतुर्थी पर इन खास बातों का जरूर ध्यान रखे और गणपति बाप्पा का पूजन दिल लगाकर करें। गणपति बाप्पा आप सभी के विघ्नों का नाश करें और अपनी कृपा आप सभी पर बनाये रखे। आपका जीवन सुखी व मंगलमय हो।


Lord Ganesh Mantra in Hindi

Ganesh Chaturthi Wishes in Hindi
Ganesh Mantra

भगवान गणेश मंत्र और साधना

कोई भी काम प्रारंभ करने से पहले गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए आप नीचे दिए गए मंत्र का जाप कर सकते हो:-

श्री गणेश मंत्र ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

भगवान श्री गणेश जी को प्रसन्न करने का एक मंत्र यह भी है:-

ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्।

नीचे दिए गये मंत्र का जाप करने से भगवान गणेश जी आपको बुद्धि प्रदान करेंगे:-

श्री गणेश बीज मंत्र ऊँ गं गणपतये नमः ।।

इस मंत्र का जाप करने से आपको सिद्धि की प्राप्ति होगी:-

एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।

श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥

अगर आपके उपर मंगल भारी है और आपको विघ्नों का नाश करना है तो आप इस मंत्र का जाप अवश्य करें:-

गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः।
द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः॥
विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्‌॥
विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत्‌ क्वचित्‌।

वैसे तो पूजा के समय आप निम्न मंत्रों का उपचारण कर सकते हो, पर इस गणेश पूजन मंत्र को आप भगवान गणेश को दीप दर्शन के समय बोल सकते हो:-

साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया ।
दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम् ।
भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने ।
त्राहि मां निरयाद् घोरद्दीपज्योत

जब आप पूजा करो तो सिन्दूर अर्पण के दौरान आप इस मंत्र जा जाप करे:-

सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् |
शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् ||

अगर भगवान को पुष्प-माला ना चढ़ाए तो पूजा अधूरी रहती है इसलिए आप पुष्प-माला जरुर चढ़ाए और पुष्प-माला के समय आप इस मंत्र का जाप करें:-

माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो |
मयाहृतानि पुष्पाणि गृह्यन्तां पूजनाय भोः ||

जब आप गणपति की पूजा करो तो इस मंत्र का जाप करते समय गणेश जी का ध्यान करें:-

खर्व स्थूलतनुं गजेन्द्रवदनं लम्बोदरं सुन्दरं प्रस्यन्दन्मदगन्धलुब्धमधुपव्यालोलगण्डस्थलम |
दंताघातविदारितारिरूधिरैः सिन्दूरशोभाकरं वन्दे शलसुतासुतं गणपतिं सिद्धिप्रदं कामदम् ||

Ganesh Chaturthi Kab Hai 2021 Mein

Ganesh Chaturthi 2021 DateFriday, 10 September 2021

हमारे भारतवर्ष में सबसे पहले होने वाली पूजा गणेश पूजा है क्योंकि गणेश पूजा के बिना किसी भी पूजा की शुरुआत नहीं हो सकती हैं। गणेश पूजा भाद्रपद महीने में होता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष गणेश उत्सव 10 सितंबर 2021 के दिन मनाई जाएगी। यह पूजा 10 दिनों तक चलती है अतः इस पूजा की समाप्ति 21 सितंबर को होगी।


Ganesh Chaturthi Ka Matlab Kya Hai

चांद के किसी भी पक्ष की चौथी स्थिति को चतुर्थी कहते हैं। चतुर्थी एक स्त्रीलिंग शब्द है! गणेश पूजा को गणेश चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।

शिव पुराण के अनुसार हिंदी कैलेंडर के भाद्रपद महीने (Bhadrapada Month) के चतुर्थी के दिन मंगल मूर्ति गणेश भगवान की श्रद्धालुओं द्वारा आज भी असीम श्रद्धा के साथ पूजा आराधना की जाती है। शिव पुराण में इस दिन को चार भुजा धारी गणेश की अवतरण-तिथि कहा जाता है। जबकि गणेश पुराण के अनुसार गणेश अवतार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन को गणेश जी की जन्मतिथि कहा जाता हैं।

गणेश चतुर्थी को भारत के कई सारे राज्यों में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र में तो गणेश चतुर्थी 2021 को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। गणेश पुराण और दूसरे वेदों में दिए गए व्याख्या के अनुसार गणेश जी का जन्म गणेश चतुर्थी के दिन हुआ था इसीलिए उनके जन्म दिवस के अवसर पर हर वर्ष गणेश चतुर्थी मनाई जाती है।

गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घर पर गणेश जी की मूर्ति लाते हैं और 9 दिनों तक मूर्ति की पूजा करते हैं। इन दिनों वातावरण में भक्ति का रंग छाया हुआ होता है और सभी गणेश जी की भक्ति में लीन रहते हैं।


महाराष्ट्र में गणेश की पूजा क्यों की जाती है?

गणेश पूजा को वैसे तो पूरे भारत में बड़े ही जोरों शोरों से मनाया जाता है लेकिन जिस तरह से महाराष्ट्र में गणेश पूजा मनाया जाता है वह देखने लायक ही होता है। क्योंकि महाराष्ट्र में गणेश जी की बड़ी-बड़ी मूर्तियों की पूजा की जाती है। इतना ही नहीं महाराष्ट्र में गणेश जी की मूर्ति की 9 दिनों तक पूजा की जाती है जबकि दूसरी जगहों पर 3 से 5 दिन के अंदर ही गणेश पूजा की जाती है।

महाराष्ट्र में इतनी धूमधाम से गणेश पूजा मनाने के पीछे यह एक बहुत मुख्य कारण माना जाता है। महाराष्ट्र में गणेश पूजा मनाने की परंपरा पेशवाओं ने शुरू की थी। इतिहास में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि महाराष्ट्र के पेशवा गणेश पूजा को एक बड़े त्यौहार के रुप में मनाते थे और तब से यह प्रथा चली आ रही है। इतिहास में इस बात की पुष्टि की गई है कि पेशवा सवाई माधवराव के शासनकाल में पुणे के प्रसिद्ध शनिवार वाड़ा नामक राजमहल में बहुत ही भव्य रुप से गणेश उत्सव मनाया जाता था।

सन् 1918 में जब हमारा देश अंग्रेजों से संघर्ष कर रहा था तो बाल गंगाधर तिलक ने लोगों को एकत्र करने के लिए भव्य रुप में गणेश उत्सव मनाने का सोचा जिसमें बहुत सारे लोग सम्मिलित हो गए हैं। जिसके बाद से महाराष्ट्र में बहुत ही भव्य और बड़े तौर पर गणेश उत्सव मनाया जाने लगा।


What is difference between Vinayaka Chaturthi and Sankashti Chaturthi in Hindi

हर महीने में दो चतुर्थी होती है! चतुर्थी को भगवान श्री गणेश जी की तिथि मानी जाती है। अमावस्या के बाद जो चतुर्थी आती है उसे विनायक चतुर्थी और पूर्णिमा के बाद जो चतुर्थी आती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। भगवान श्री गणेश की पूजा से बड़ा से बड़ा विघ्न भी दूर हो जाता है। भक्तों के हर कष्ट का निवारण हो जाता है यही कारण है कि अमावस्या यानी काली अंधेरी रात बाद जो चतुर्थी आती है उसे विनायक चतुर्थी कहते हैं। विनायक चतुर्थी में ही गणेश जी की पूजा होती है जबकि संकष्टी चतुर्थी में गणेश जी की पूजा नहीं होती है।


गणेश जी की मूर्ति को हम कितने दिन घर में रख सकते हैं?

गणेश जी की पूजा पूरे देश में विधि विधान से अलग-अलग तरीकों से की जाती है। फूल, लड्डू मोदक से सजाकर गणेश जी की पूजा की जाती है। गणेश जी को सभी लोग गणेश चतुर्थी के दिन अपने घर पर लाते हैं और उनकी पूजा करते हैं। कुछ लोग गणेश जी की मूर्ति को अपने घर पर 3 दिनों के लिए रखते हैं। तो वहीं कुछ लोग गणेश जी की स्थापना 5 दिनों के लिए करते हैं। लेकिन महाराष्ट्र में जहां गणेश जी की पूजा बहुत ही जोरों शोरों से की जाती हैं। वहां गणेश जी को अपने घर पर 9 दिनों तक बहुत ही प्यार और दुलार से रखा जाता है।

हर बार की तरह इस बार भी गणेश भगवान की भक्ति में चारों तरफ गणपति बप्पा मोरिया के स्वर सुनाई देंगे। इसी प्रार्थना के साथ की भगवान श्री गणेश आपके जीवन में आपकी परेशानियों को मिटा कर आपको भरपूर धन-धान्य, सुख शांति प्रदान करेंगे। आपको इस वर्ष गणेश चतुर्थी की हिमांशु ग्रेवाल की तरफ से ढेर सारी शुभकामनाएं।


Ganesh Chaturthi Wishes in Hindi
आपकी तरक्की की,
हर किसी की ज़बान पर बात हो..
जब भी कोई मुश्किल आये,
माय फ्रेंड गणेशा आप के साथ हो.
Happy Ganesh Chaturthi Messages in Hindi
भगवान श्री गणेश की कृपा,
बनी रहे आप हर दम.
हर कार्य में सफलता मिले,
जीवन में न आये कोई गम।
Happy Ganesh Chaturthi Quotes in Hindi
सब शुभ कारज में पहले पूजा तेरी,
तुम बिना काम ना सरे, अरज सुन मेरी।
रिध सिध को लेकर करो भवन में फेरी
करो ऐसी कृपा नित करूं मैं पूजा तेरी।
गणेश चतुर्थी की शुभ कामनाएं!
Happy Ganesh Chaturthi Status in Hindi
भक्ति गणपति, शक्ति गणपति
सिद्दी गणपति, लक्ष्मी गणपति
महा गणपति, देवो में श्रेष्ठ मेरे गणपति
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं
Ganesh Chaturthi Ki Hardik Shubhkamnaye in Hindi
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा

प्रिय भक्तो अगर आपको गणेश चतुर्थी के बारे में कुछ और बाते पता है जो आपको इस आर्टिकल में ना मिली हो तो आप कमेंट के माध्यम से हम सबके साथ शेयर कर सकते हो और गणेश जी की जानकारी को जितना हो सके फेसबुक, ट्विटर, गूगल+ और व्हाट्सएप्प पर शेयर जरुर करें. आपको गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें! 🙂

5 thoughts on “Ganesh Chaturthi 2021: गणेश चतुर्थी का महत्व, निबंध इतिहास और विनायक चतुर्थी व्रत विधि कथा आरती”

  1. Ganpati bappa moriyaa….
    nice information..
    I would like to know that..chand ko ganesh chturthi ke din q nahi dekhna chahiye.. in detail

    Reply

Leave a Comment

close